:
Breaking News

भोजपुर में एनकाउंटर पर बवाल, युवक की मौत के बाद सड़क पर शव रखकर प्रदर्शन

top-news
https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

भोजपुर में कथित एनकाउंटर के बाद युवक की मौत से बवाल। परिजनों ने फर्जी मुठभेड़ का आरोप लगाया, पुलिस जांच में जुटी।

आरा/आलम की खबर:भोजपुर जिले में पुलिस एनकाउंटर को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के रहने वाले युवक भरत तिवारी की पुलिस मुठभेड़ के बाद इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद इलाके में भारी तनाव फैल गया है। घटना के बाद परिजनों और ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे फर्जी एनकाउंटर बताया है और शव के साथ सड़क जाम कर दिया है। बक्सर-आरा मुख्य मार्ग पर प्रदर्शन के कारण यातायात पूरी तरह बाधित हो गया और मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई।

पुलिस का दावा है कि यह कार्रवाई उस समय की गई जब युवक कथित तौर पर हथियार के साथ पुलिस टीम को धमका रहा था और फायरिंग कर रहा था। पुलिस के अनुसार, जवाबी कार्रवाई में हुई गोलीबारी के दौरान युवक को तीन गोलियां लगीं, जिसके बाद उसे गंभीर हालत में आरा सदर अस्पताल ले जाया गया और बाद में पटना पीएमसीएच रेफर किया गया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। पुलिस का कहना है कि पूरी घटना आत्मरक्षा में की गई कार्रवाई का परिणाम है और जांच की जा रही है।वहीं दूसरी ओर, मृतक के परिजनों ने पुलिस के दावे को पूरी तरह खारिज किया है। मृतक के पिता काशीनाथ तिवारी ने आरोप लगाया है कि उनके बेटे ने पुलिस के सामने हथियार फेंक दिया था और सरेंडर कर दिया था, इसके बावजूद उसे गोली मार दी गई। परिजनों का कहना है कि युवक का किसी आपराधिक मामले से कोई सीधा संबंध नहीं था और उसे बिना वजह निशाना बनाया गया। इस आरोप के बाद गांव में गुस्सा और आक्रोश और तेज हो गया है।

घटना के बाद बड़ी संख्या में ग्रामीण सड़क पर उतर आए और शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और मामले की निष्पक्ष जांच तथा दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई की मांग की। इस दौरान सड़क पूरी तरह जाम हो गई और कई घंटों तक आवागमन ठप रहा।फिलहाल मौके पर शाहपुर थाना पुलिस तैनात है और स्थिति को नियंत्रित करने की कोशिश की जा रही है। प्रशासन लगातार लोगों को समझाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन ग्रामीण अभी भी अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं। इलाके में तनावपूर्ण माहौल बना हुआ है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है।

इस पूरे मामले में पुलिस और परिजनों के दावे पूरी तरह अलग-अलग हैं। एक तरफ पुलिस इसे मुठभेड़ में हुई वैध कार्रवाई बता रही है, तो दूसरी तरफ परिजन इसे फर्जी एनकाउंटर करार दे रहे हैं। अब इस मामले की सच्चाई जांच के बाद ही सामने आ पाएगी।

भोजपुर की यह घटना एक बार फिर पुलिस कार्रवाई और आम जनता के बीच विश्वास की खाई को उजागर करती है। एनकाउंटर जैसी घटनाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच बेहद जरूरी होती है, ताकि किसी भी पक्ष के साथ अन्याय न हो।

अगर परिजनों के आरोप सही साबित होते हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक चूक होगी, और यदि पुलिस का दावा सही निकलता है, तो भी पूरे घटनाक्रम की स्पष्टता जनता के सामने आनी चाहिए। ऐसे मामलों में भावनाओं से अधिक तथ्य और सबूत महत्वपूर्ण होते हैं।

लोकतंत्र में कानून व्यवस्था का आधार विश्वास पर टिका होता है। इसलिए हर विवादित एनकाउंटर की स्वतंत्र जांच जरूरी है, ताकि सच सामने आ सके और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

https://maannews.acnoo.com/public/frontend/img/header-adds/adds.jpg

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *